Shiksha News-New Delhi। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सीबीएसई की नई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर चिंता जताई है। श्री वेणुगोपाल ने कहा कि सीबीएसई के कक्षा 10वीं और 12वीं के परिणामों में भारी गड़बड़ियां सामने आई हैं, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि नई “ऑन-स्क्रीन मार्किंग” डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली पूरी तरह विफल साबित हुई है। छात्रों ने शिकायत की है कि सही उत्तर लिखने के बावजूद उन्हें शून्य अंक दिए गए हैं। कई छात्रों को उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी धुंधली, कटी हुई या पढ़ने योग्य नहीं मिली, जिससे वे अपने अंकों की जांच तक नहीं कर पा रहे हैं।
पत्र में एक मामले का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एक छात्र को फिजिक्स की उत्तर पुस्तिका में ऐसी हैंडराइटिंग मिली जो उसकी थी ही नहीं, जिससे उत्तर पुस्तिकाओं के आपस में बदल जाने की आशंका पैदा होती है। उन्होंने यह भी कहा कि अलग-अलग सेट के प्रश्नपत्रों के कठिनाई स्तर में भारी अंतर था, जिसके कारण छात्रों में असमानता पैदा हुई और ग्रेस मार्क्स देने की मांग उठी है।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि रिजल्ट के बाद वेरिफिकेशन पोर्टल भी बुरी तरह ठप हो गया। छात्रों को आइ हजार रूपए से लेकर 69 लाख 420 रूपए तक की भारी-भरकम री-इवैल्यूएशन फीस दिखाई गई, जिससे छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी है।
पत्र में कहा गया कि आईआईटी मद्रास और आईआईटी कानपुर के तकनीकी विशेषज्ञों को पोर्टल सुधारने के लिए लगाने की सरकार की घोषणा केवल वेबसाइट की समस्या तक सीमित है, जबकि असली समस्या पूरी डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में हुई गंभीर खामियां हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की कि प्रभावित छात्रों के लिए समयबद्ध “वन टाइम रिड्रेसल” व्यवस्था लागू की जाए ताकि किसी छात्र का उच्च शिक्षा में दाखिला प्रभावित न हो।
उन्होंने कहा कि “जो सरकार एक साधारण बोर्ड परीक्षा तक सही ढंग से आयोजित नहीं कर सकती और पहले ही नीट जैसे बड़े विवाद में विफल रही है, उसे ‘विश्वगुरु’ होने के बड़े-बड़े दावे करने का कोई अधिकार नहीं है। हमारे छात्रों को पारदर्शी और त्वरित न्याय मिलना चाहिए।”

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