Shiksha News- New Delhi। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की ने जेईई (एडवांस) का डाटा लीक होने के दावों को गुमराह करने वाला और पूरी तरह गलत करार दिया है। संस्थान का दावा है कि ‘क्लाउड स्टोरेज’ में कुछ समय के लिए तकनीकी गड़बड़ी के बावजूद न तो कोई संवेदनशील जानकारी लीक हुई है, न ही बड़े पैमाने पर डाटा निकाला गया है। सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक के बाद एक कई पोस्ट में आईआईटी ने इस मामले पर अपना पक्ष रखा है। आईआईटी रुड़की ने इस साल जेईई परीक्षा आयोजित की थी। संस्थान ने पोस्ट में लिखा, ‘सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने की कोशिश की जा रही है। सोशल मीडिया पर आने वाली जानकारी यह नहीं बताती है कि असल में हुआ क्या है।’ संस्थान ने दावा किया कि प्रभावित स्टोरेज ‘रीड ओनली’ था, यानी उसमें किसी भी डाटा को संपादित या मिटाया नहीं जा सकता था। इसके अलावा क्लाउड एक्सेस लॉग के विश्लेषण से यह भी पुष्टि हुई कि डाटा का कोई ‘बल्क डाउनलोड’ नहीं हुआ था।संस्थान ने कहा कि इस घटना का परीक्षा के नतीजों पर कोई असर नहीं हुआ, जिसमें छात्रों के अंक, रैंक और कैटेगरी शामिल हैं। संस्थान ने कहा कि वह जेईई (एडवांस्ड) और संयुक्त सीट आवंटन प्राधिकरण (जोसा) की काउंसिलिंग प्रक्रियाओं की निष्पक्षता, सुरक्षा और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। संस्थान ने कहा, ‘इस तकनीकी घटना को गलत तरीके से पेश करने और परीक्षा प्रणाली में जनता के भरोसे को कम करने की जानबूझकर की गई कोशिशें चिंताजनक हैं और इन्हें हतोत्साहित किया जाना चाहिए।’छात्रों की मदद के लिए किए बदलावसंस्थान के अनुसार, दो जून को पोर्टल पर कुछ तकनीकी बदलाव किए गए थे। ऐसा उन अभ्यर्थियों की मदद के लिए किया गया, जिन्हें एडमिट कार्ड का डाटा देखने में दिक्कत हो रही थी। संस्थान का कहना है कि यह बदलाव पंजीकरण की प्रक्रिया को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए किए गए थे।हैकर की बताई खामियां तुरंत दूर कींसंस्थान ने बताया कि तकनीकी बदलाव के दौरान क्लाउड स्टोरेज के एक हिस्से में बहुत कम समय के लिए मामूली गलत कॉन्फिगरेशन हो गया था। इसकी पहचान एथिकल हैकर राइलन अनिल ने की और जानकारी दी कि वह संबंधि डाटाबेस तक पहुंच सकते हैं। । संस्थान के अनुसार, राइलन अनिल की दी जानकारी के आधार पर तकनीकी गड़बड़ी को तत्काल दूर कर डाटा तक पहुंच को सीमित किया गया।

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