शिक्षा न्यूज. नई दिल्ली। बिहार की राजधानी पटना में मेडिकल छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर रविवार को छात्रा के परिजनों और संघर्ष समिति ने धरना प्रदर्शन किया। बिहार पुलिस के साक्ष्यों के साथ कथित छेड़छाड़ को लेकर स्थानीय नागरिकों में गहरा रोष है। इस मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली-एनसीआर के नागरिकों के एक समूह ने प्रधानमंत्री को प्रतिवेदन भेजकर व्यक्तिगत हस्तक्षेप की अपील की है।
मीडिया के सवाल के जबाव में मृतका के पिता ने कहा कि उन्हें अपनी बेटी के लिए न्याय चाहिए। उनकी मांग है कि छात्रावास प्रबंधन और संदिग्ध डॉक्टरों की भूमिका की गहनता से निष्पक्ष जांच हो और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। इस मामले को लेकर बिहार सरकार के प्रति नागरिकों ने नाराजगी जताई है और उनका आरोप है कि छात्रा 05 जनवरी तक पूरी तरह स्वस्थ थी, लेकिन उसी रात हॉस्टल प्रबंधन के संरक्षण में उसके साथ एक जघन्य अपराध घटित हुआ। जिसके विवरण को पुलिस एवं प्रशासन की तरफ से जानबूझकर छिपाया गया। उन्होंने कहा कि छात्रा को 6 जनवरी को माता-पिता की जानकारी के बिना निजी अस्पतालों में घुमाया गया। 9 जनवरी को होश आने पर छात्रा ने अपनी मां से कहा कि मेरे साथ कुछ बुरा हुआ है। इसके बाद 11 जनवरी इलाज के दौरान छात्रा ने दम तोड़ दिया।
इसके अलावा, छात्रा के नाबालिग होने के बावजूद उसकी आयु 18 वर्ष दर्ज की गई। अपराध स्थल (हॉस्टल रूम) को तुरंत सील नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि शुरुआत में स्थानीय पुलिस ने इसे ‘सुसाइड’ और ‘बीमारी’ का रूप देने की कोशिश की लेकिन पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट में छात्रा के शरीर पर चोट के निशान और यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई है, जिसने पुलिसिया दावों को बेबुनियाद करार दे दिया है। मामला अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया है, लेकिन नागरिकों का मानना है कि स्थानीय प्रभाव और प्रभावशाली लोगों के संरक्षण के कारण जांच को कमजोर किया जा सकता है। उनके अनुसार इस मामले की निगरानी उच्च स्तर पर हो ताकि विधि के शासन में जनता का विश्वास बहाल हो सके।

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